Vitamins in Hindi विटामिन एवं उसके प्रकार के नाम ,कमी ,स्रोत व रोग

विटामिन्स एवं उसके प्रकार (Types) के नाम Most Essential vitamins in Hindi विटामिन की कमी ,रोग व जरुरत के बारे में जानेगे जो हमारे Health के लिए benefit का काम करेगा

आपके मन में प्रश्न उठता है ?

Vitamins क्या है ? विटामिन कितने प्रकार के होते हैं? Vitamins A,B,C,D,E,K की कमी से कौन सा रोग होता है ? विटामिन के के स्रोत कौन कौन से हैं ? जल में घुलनशील Vitamins कौन कौन से हैं ? विटामिन के का रासायनिक नाम क्या है ?वसा में घुलनशील विटामिन कौन कौन से हैं ? विटामिन की खोज किसने किया ?

Vitamins का नामकरण या खोज


मैगेन्ड्री (1816) तथा लूनिन (1880) ने अनेक प्रयोगों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि प्राकृतिक भोजन में अन्य पोषक पदार्थों जैसे कार्बोहाइड्रेट्स, वसा, प्रोटीन्स व खनिज लवणों के अतिरिक्त कुछ अज्ञात पदार्थ’ उपस्थित होते हैं, जो बहुत ही सूक्ष्म मात्रा में शरीर की वृद्धि तथा विकास के लिए अति आवश्यक होते हैं।
विटामिन की खोज -होपकिन्स ने सन् 1906 में इन्हें ‘अतिरिक्त भोजन कारक’ कहा तथा सन् 1912 में फुन्क ने इनको विटामिन (Vitamin) नाम दिया।

Vitamins in Hindi विटामिन क्या है ?

Vitamin, वे जटिल कार्बनिक पदार्थ हैं, जो कि मनुष्य व जन्तुओं के शरीर की विभिन्न उपापचय क्रियाओं को नियन्त्रित करते हैं, शरीर की वृद्धि करते हैं, इनकी आवश्यकता शरीर को सूक्ष्म मात्रा में होती है, इनकी कमी से शरीर में अनेक रोग उत्पन्न होते हैं, जन्तु इन्हें वनस्पतियों से ही भोजन के साथ सूक्ष्म मात्रा में प्राप्त करते हैं तथा ये विभिन्न एन्जाइमों से साथ कोएन्जाइम की तरह संयोजन करते हैं।

Vitamins का रासायनिक संघटन-विटामिन्स रासायनिक प्रकृति में भिन्न-भिन्न होते हैं । कुछ विटामिन्स एल्कोहॉल, कुछ स्टेरॉल (Sterol) और कुछ क्विनोन (Quinone) होते हैं।

विटामिन्स का वर्गीकरण ( Classifications of Vitamins )
विटामिन्स को उनकी विलेयता के आधार पर दो वर्गों में बाँटा गया है-
(A) वसा में घुलनशील विटामिन्स-A, D, E और K.
(B) जल में घुलनशील विटामिन्स-B-complex, C तथा P.

वसा में घुलनशील विटामिन्स – Soluble Vitamins in Fat

  1. विटामिन्सAया रेटिनॉल (Vitamin A or Retinol or Antixerophthalmic Vitamin)
    कार्य-(i) यह शरीर की वृद्धि को प्रभावित करता है।
    (ii) त्वचा तथा नेत्रों की कॉनिया के एपिथीलियमी ऊतकों को स्वस्थ बनाये रखता है।
    (iii) दाँतों एवं हड्डियों को भी स्वस्थ बनाता है।
    (iv) नेत्रों में दृष्टि के लिए आवश्यक वर्णकों के निर्माण में भाग लेता है।
    विटामिन A का निर्माण-विटामिन A का निर्माण कैरोटीन (Carotene) नामक शाक वर्णक से करते हैं । यह हल्के पीले रंग का होता है और गाजर में बहुतायत से पाया जाता है।
    Vitamin A का स्रोत -कॉड मछली का यकृत, दूध, दही, घी, मक्खन, अण्डा, गाजर, पपीता, टमाटर, केला, पालक, शकरकन्द आदि ।

विटामिन Aकी कमी से उत्पन्न रोग-
(i) मानव व पशुओं में रतौंधी (Night Blindness) रोग।
(ii) नेत्र सूखने लगते हैं, कॉर्निया एवं कंजक्टाइवा शुष्क हो जाते हैं । इस रोग को जीरोपथैलमिया कहते हैं।
(iii) जनन क्षमता क्षीण होने लगती है और मूत्रोजनन वाहिनियों में सूजन आ जाती है।
(iv) गर्भ में शिशु की वृद्धि रुक जाती है, बुद्धि मन्द हो जाती है।
(v) त्वचा शुष्क व शल्कीय हो जाती है, इस रोग को डर्मेटोसिस कहते हैं।
(vi) शरीर की वृद्धि रुक जाती है।
(vii) दाँतों तथा हड्डियों का विकास रुक जाता है।

2.विटामिन D या कैल्सिफेरॉल (Vitamin Dor Calciferol or Antirackitic Vitamin)

विटामिन D का कार्य-(i) यह विटामिन कैल्सियम व फॉस्फोरस के उपापचय को नियन्त्रित करता है।
(ii) दाँतों व हड्डियों के विकास को नियन्त्रित करता है।
विटामिन D का निर्माण-इस विटामिन का निर्माण पराबैंगनी किरणों के स्टेरॉल्स (Sterols) के ऊपर प्रभाव पड़ने से होता
है। शाकाहारी अपनी त्वचा कोशिकाओं में पेड़-पौधों से प्राप्त अर्गोस्टेरॉल (Ergosterol) नामक पदार्थ से इस विटामिन का निर्माण करते हैं।

विटामिन D का स्रोत-मछलियों का तेल, दूध, अण्डे, यकृत तथा मक्खन आदि।
कमी से उत्पन्न रोग-(i) सूखा रोग या रिकेट्स (Rickets)-इस रोग में शरीर की हड्डियाँ कमजोर व लचीली होकर मुड़ जाती हैं। शरीर की वृद्धि रुक जाती है।
(ii) ऑस्टियोमैलेसिया (Osteomalacia)—इस रोग में श्रोणि मेखला व पसलियाँ कमजोर व कोमल हो जाती हैं।

3.विटामिन E या टॉकोफेरॉल (Vitamin E or Tocopherol)

Vitamin E का कार्य-(i) जनन अंगों को सामान्य बनाये रखने का कार्य करता है।
(ii) लगातार गर्भ ठहरने पर साधारण रूप से बच्चा पैदा होने में सहायता करता है।
स्रोत-अंकुरित बीज, सलाद, अल्फा-अल्फा पत्तियाँ, कपास के बीज का तेल, चावल के छिलकों का
तेल, सोयाबीन का तेल, दूध, अण्डा, मांस आदि।
विटामिन E के कमी से उत्पन्न रोग-(i) जननांग नष्ट होने लगते हैं।
(ii) स्त्रियों में निषेचन के कुछ दिन बाद भ्रूण मर जाता है।
(iii) शरीर की पेशियाँ कमजोर हो जाती हैं, अंगघात या लकवा (Paralysis) भी हो जाता है।


4.विटामिन K (Vitamin K)

Vitamin K का कार्य-यकृत में प्रोनॉम्बिन प्रोटीन के निर्माण के लिए आवश्यक होता है। प्रोथॉम्बिन रक्त के जमने में भाग लेती है।
स्रोत-पालक, टमाटर, बथुआ, गोभी, अण्डे की जर्दी, दूध आदि।
कमी से उत्पन्न रोग-(i) इसकी कमी से रुधिर का थक्का देर से जमता है अर्थात् हीमोफिलिया रोग हो जाता है।
(ii) बच्चों में दस्त लग जाते हैं।


जल में घुलनशील विटामिन्स -Soluble Vitamins in Hindi with Water


1.विटामिन्स B-कॉम्प्लेक्स (Vitamin B-complex)

यह कई विटामिन्स से बनी एक जटिल विटामिन है। इसके मुख्य विटामिन्स निम्नलिखित हैं-


(a) विटामिन B1 या थायमीन (Vitamin B1 or Thiamine)

कार्य-यह कार्बोहाइड्रेट उपाचपचय को नियन्त्रित करता है। शिशु में द्धि को नियन्त्रित करता है।
स्रोत-अनाजों के छिलके, बीज, जई, सेम, सन्तरा, टमाटर, दूध व अण्डे, हरी सब्जी, मूंगफली आदि।
कमी से उत्पन्न रोग-(i) बच्चों में भूख खत्म हो जाना ।
(ii) बेरी-बेरी रोग-यह रोग वयस्कों में होता है, इस रोग में मस्तिष्क का सन्तुलन खराब हो जाता है। हृदय, अहारनाल व पेशियों की क्रिया मन्द पड़ जाती है।
(iii) पशुओं में पॉलिन्यूराइटिस रोग हो जाता है, जिसमें हाथ या पैर में लकवा मार जाता है।

(b) विटामिनB2या राइबोफ्लेविन (Vitamin B, or Riboflavin)

इसे विटामिन ‘G’ भी कहते हैं।
कार्य-कार्बोहाइड्रेट्स के उपापचय को नियन्त्रित करता है तथा अनेक एन्जाइमों के साथ सह-एन्जाइम के रूप में कार्य करता है।
स्रोत-ताजा मांस, सूखा दूध, मछली, हृदय, वृक्क, अण्डे, गेहूँ, चना, पालक, हरी सब्जी आदि ।
कमी से उत्पन्न रोग-(i) पाचन शक्ति कमजोर, दिमागी थकावट व स्मृति कमजोर हो जाती है।
(ii) कीलोसिस (Chelosis) रोग-नेत्र कमजोर हो जाते हैं, होंठ फटकर सूज जाते हैं।
(iii) ग्लोसाइटिस (Glossitis) या जिह्वाशोध रोग-त्वचा फट जाती है जिव्हा में सूजन आ जाती है।


(c) विटामिन B3 या पेन्टोथेनिक अम्ल (Vitamin B3 or Pantothenic acid)

कार्य-(i) अनेक रासायनिक प्रतिक्रियाओं में सह-एन्जाइम की तरह कार्य करता है
(ii) शरीर की वृद्धि को नियन्त्रित करता है।
(iii) त्वचा व बाल का वर्णकता को नियन्त्रित करता है।
स्रोत-यकृत, मांस, दूध, शहद, अण्डे, यीस्ट, वृक्क तथा मस्तिष्क।
कमी से उत्पन्न रोग-शरीर की वृद्धि रुक जाती है, बाल सफेद होने लगते हैं, त्वचा सूख जाती है और
जनन क्षमता कम हो जाती है।


(d) विटामिन B5 या निकोटिनिक अम्ल या नियासिन (Vitamin B5 or Nicotinic acid or Niacin)

इसे विटामिन P P भी कहते हैं।
कार्य-यह कार्बोहाइड्रेट तथा ऐमीनो अम्लों के ऑक्सीकरण में सहायक होता है तथा सह-एन्जाइम की तरह कार्य करता है।

स्रोत-यकृत, गेहूँ, मांस, फल और सब्जी।
कमी से उत्पन्न रोग-पेलेग्रा (Pelagra) या चर्मगाह रोग-इस रोग में त्वचा सूख जाती है, उस पर दाने-दाने पड़ जाते हैं। पाचन तन्त्र तथा मस्तिष्क ठीक प्रकार से कार्य नहीं करते । अधिक कमी हो जाने पर जिह्वा को श्लेष्मा सूख जाती है और उस पर दाने पड़ जाते हैं।


(e) विटामिन B6या पायरिडॉक्सिन (Vitamin B6 or Pyridoxine)-Vitamins in Hindi

कार्य-प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट व वसा के उपापचय का नियन्त्रण करता है।R.B.Cs. के निर्माण व हीमोग्लोबिन के संश्लेषण में मुख्य रूप से भाग लेता है तथा विभिन्न प्रतिक्रियाओं में सह-एन्जाइम के रूप में कार्य करता है।
स्रोत-अण्डा, दूध, मांस, यीस्ट, मछली, मटर, फल, सब्जी आदि ।
कमी से उत्पन्न रोग-(i) त्वचा सूख जाती है।
(ii) शरीर में अरक्तता (Anaemia) हो जाती है।
(ii) शरीर में दर्द होता है और देह भित्ति की तन्त्रिकाएँ एवं मेरुरज्जु कमजोर हो जाते हैं।


(1) बायोटिन या विटामिन H (Biotin or Vitamin H)

कार्य-यह वसा संश्लेषण तथा ऊर्जा उत्पादक प्रतिक्रियाओं में भाग लेता है।
स्रोत-अण्डे की जर्दी, टमाटर, वृक्क, यकृत, फल एवं मूंगफली आदि ।
कमी से उत्पन्न रोग-त्वचा सूख जाती है, पेशियाँ कमजोर हो जाती हैं, बाल गिरने लगते हैं, मस्तिष्क का सन्तुलन खराब हो जाता है।

(g) फोलिक अम्ल (Folic acid)-Vitamins in Hindi

कार्य-यह शरीर का वृद्धि, रक्त के निर्माण व न्यूक्लिक अम्लों के उपापचय में भाग लेता है। इस विटामिन का संश्लेषण आँत्र के बैक्टीरिया द्वारा होता है।
स्रोत-यीस्ट, यकृत, मांस, दूध, टमाटर, केला, सोयाबीन, वृक्क, हरी पत्तियाँ आदि ।
कमी से उत्पन्न रोग-शरीर की वृद्धि रुक जाती है। रक्त क्षीणता या ऐनीमिया (Anemia) हो जाता है।


(h) विटामिन B12, या कोबालैमिन (Vitamin B12 or Cobalamine)-

कार्य-न्यूक्लिक अम्लों तथा न्यूलियोप्रोटीन्स के उपापचय को नियंत्रित करता है। शरीर की वृद्धि तथा R.B.Cs. निर्माण को नियंत्रित करता है।
स्रोत-यकृत, सुअर का मांस, अण्डे, दूध, फल, मछली आदि ।
कमी से उत्पन्न रोग-शरीर की वृद्धि रुक जाती है, ऐनीमिया रोग हो जाता है।

विटामिन C या एस्कॉर्बिक अम्ल (Vitamin C or Ascorbic Acid)Vitamins in Hindi

कार्य-(i) अन्तराकोशिक पदार्थों के निर्माण के लिए आवश्यक होता है
(ii) शरीर में रोगों से प्रतिरक्षा शक्ति उत्पन्न करता है।
(iii) ऊतकों की वृद्धि को उत्तेजित करता है।
(iv) रक्त निर्माण में भाग लेता है।
(v) कोलेजन तन्तुओं के निर्माण में सहायक होता है।
स्रोत-हरी सब्जियाँ, ताजे फल, नीबू, सन्तरा, मुसम्मी, टमाटर, अंगूर, केला, सेब, आँवला आदि।
कमी से उत्पन्न रोग-शरीर में इसकी कमी से स्कर्वी (Scurvey) नामक रोग हो जाता है, जिसमें दाँत खराब हो जाते हैं, मसूड़ों में सूजन आ जाती है, मसूड़ों से पस और रक्त बहने लगता है, शरीर की अस्थियाँ कमजोर हो जाती हैं, जोड़ों में दर्द होने लगता है, रक्त कोशिकाएँ फटने लगती हैं ।

3.विटामिन P या सिट्रिन (Vitamin P or Citrin)

कार्य (Vitamins in Hindi ) विटामिनC को ऑक्सीकरणी विनाश से बचाता है, अत: यह ऐस्कॉर्बिक अम्ल के संरक्षण में सहायक है
स्रोत-नीबू, सन्तरा, मुसम्मी आदि फलों में ग्लूकोसाइड के रूप में पाया जाता है ।
कमी से उत्पन्न रोग-इसकी कमी से रक्त स्राव होने लगता है।

GENERAL SCIENCE QUESTIONS IN HINDI

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