Phylum-Porifera (sponge)-संघ पोरीफेरा

संघ पोरीफेरा-Phylum-Porifera (sponge) इस लेख के जरिये हम जानेगे पोरिफेरा क्या है ,इनके लक्षण क्या हैं व इस फाइलम के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण कौन कौन हैं ?

संघ पोरीफेरा kingdom porifera -PHYLUM-porifera


(Latin:Poros = Pore + Fera = To Bear)
पोरिफेरा क्या होता है-पोर का मतलब छोटे छोटे छेद व फेरा का मतलब जंतु -यानि स्पंजी जीव (Phylum-Porifera)

संघ पोरीफेरा के लक्षण Porifera phylum characteristics
सरल, कम विकसित, ऊतकहीन, बहुकोशिकीय तथा शरीर पर असंख्य छिद्रों वाले (Pore bearers)
जन्तुओं को संघ-पोरीफेरा में रखा गया है । ये जलीय होते हैं और इन्हें स्पन्ज जन्तु( sponges animal) भी कहते हैं । प्राकृतिक
स्पन्ज पोरीफेरा के कुछ सदस्यों का कंकाल होता है । इसका उपयोग अतीत काल से पानी सोखने के लिए किया
जाता है । आजकल रबड़, नाइलॉन के नकली स्पन्ज बनते हैं ।
सन् 1825 में पोरीफेरा शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम ग्राण्ट (Grant) ने किया । इनकी लगभग 10,000 जातियाँ ज्ञात है ।

पोरीफेरा संघ के सामान्य लक्षण (Phylum-Porifera characteristics)

  1. जलीय, अधिकांश समुद्री, पत्थरों, चट्टानों, लकड़ी के टुकड़ों, अन्य जन्तुओं के कवचों आदि पर
    चिपकी रचना के रूप में पाये जाते हैं।
  2. इनके शरीर पर असंख्य छोटे-छोटे छिद्र पाये जाते हैं, जिन्हें ऑस्टिया (Ostia) कहते हैं । इन छिद्रों के
    कारण ही ये स्पंज जैसा व्यवहार करते हैं
  3. शरीर के अग्र भाग पर एक या एक से ज्यादा छिद्र पाये जाते हैं, जिसे ऑस्कुलम (Osculum) कहते।
  4. ये एक से 100 सेमी तक लम्बे नालाकार रचनाओं के समूहों में स्थित होते हैं ।
  5. शरीर संगठन कोशीय स्तर का होता है अर्थात् इनमें ऊतकों का अभाव होता है । शरीर कोशिकाओं में
    श्रम-विभाजन (Division of labour) पाया जाता है लेकिन समान कोशिकाएँ ऊतक नहीं बनाती इस कारण
    शरीर कोशिकाओं का एक समूह मात्र होता है ।
  6. शरीर में एक नाल प्रणाली (Canal system) पायी जाती है। देहभित्ति में स्थित असंख्य छिद्रों द्वारा बाहरी
    जल लगातार नाल प्रणाली में बहता हुआ शरीर की देहगुहा या स्पंज गुहा (Spongocoel) में पहुंचकर शरीर के
    स्वतन्त्र छोर पर स्थित ऑस्कूलम द्वारा बाहर निकलता रहता है। भीतरी कोशिकाएं इस जल प्रवाह से भोजन तथा
    आक्सीजन ग्रहण करती है)
    7.शरीर द्विस्तरीय होता है । दोनों स्तरों के बीच जेली के समान मध्य स्तर (Mesoderm) पायी जाती है।
  7. नाल प्रणाली तथा पूरे शरीर को साधने के लिए मध्य स्तर में सिलिशियस (Siliceous) या कैल्केरियस
    (Calcareous) कंटिकाओं (Spicules) के रूप में विशिष्ट कंकाल पाया जाता है ।
  8. इनमें कायिक तथा लैंगिक दो प्रकार का जनन होता है। कायिक जनन विखण्डन के द्वारा होता है।
    क्योंकि इनमें पुनर्जनन (Regeneration) की असीम शक्ति होती है स्पंज उभयलिंगी (Hermaphrodite) होते हैं
    और लैंगिक जनन के समय इनकी कुछ कोशिकाएँ अण्ड व कुछ शुक्राणु का काम करती हैं । दोनों मिलकर
    युग्मनज बनाती हैं जो नये स्थान पर स्थिर होकर नया स्पंज बना देता है ।

पोरीफेरा का वर्गीकरण Classification and examples of porifera


इसे कंकाल की रचना के आधार पर चार वर्गों में बाँटते हैं-
(a) वर्ग कैल्केरिया (Class-Calcarea)—इनका कंकाल कैल्सियम कार्बोनेट (CaCO3 ) की बनी
कोशिकाओं का बना होता है । उदाहरण ल्यूकोसोलेनिया(Leucosolenia), साइकॉन (Sycon), ग्रैन्सिया
(Grantia),ऑलिन्थस (Olynthus)|

(b) वर्ग हेक्साक्टिनेलिडा (Class-Hexactinelida)-इनका कंकाल छ: सिरों वाली सिलिका की
बनी कंटिकाओं का बना होता है। उदाहण—यूप्लेक्टेला (Euplectela) हायलोनेमा (Hylonema) ।
(c) वर्ग-डेमोस्पॉन्जी (Class-Dernospongiae)—इनका कंकाल स्पॉन्जिन तन्तुओ या सिलिकामय
कंटिकाओं या दोनों का बना होता है। कंटिकाएँ कभी भी छ: सिरीय नहीं होतीं । उदाहरण-थीनिया (Thenia).
आस्कैरेला (Oscarella), स्पॉजिला (Spongilla), विलयोना (cliona), यूस्पॉन्जिया (Euspongia):
स्पॉन्जिया (Spongia) ।

(d) वर्ग-स्कलेरोस्पॉन्जी (Sclerospongine) इनकी कटिकाएँ सिलिका युक्त तथा एक अक्षीय होती
हैं । उदाहरण-सेराटोपोरेला (Ceratoporella) |

पोरीफेरा जीवों के आवास के सम्बन्ध में लक्षण (Porifera’s features with relation to habitat)
-पोरोफेरा संघ के जीव जल में पाये जाते हैं और जलीय आवास के लिए पूर्णत: अनुकूलित होते हैं
इसके शरीर में विकसित तंत्रों का आभाव होता है इस कारण इनके शरीर की कोशिकाएं जल से सीधे संपर्क में रहती है जिससे
जल से अपनी आवश्यकता की चीजों को ग्रहण कर सके तथा उत्सर्जी पदार्थों का जल में त्याग कर सकें।
इनके शरीर के ऊपर अनेक छिद्र पाये जाते हैं, जिससे इनके शरीर में जल प्रवेश करता है ।
शरीर में नाल तन्त्र पाया जाता है जिससे जल का संवहन होता है ।
जल का संवहन श्वसन, पोषण, उत्सर्जन तथा जनन में मदद करता है।

पोरीफेरा के कुछ महत्त्वपूर्ण जन्तु/ पादप -Phylum-Porifera animals/plants


साइकॉन वास्तव में एक समुद्री जीव है जो अक्सर चट्टानों में चिपके पाए जाते है ये porifera संघ का एक महत्वपूर्ण जीव है

  1. साइकॉन या स्काइफा (Sycon or Scypha)
    संघ पोरीफेरा
    वर्ग कैल्केरिया
    गण हेटेरोसिला
    Sycon characteristics-साइकॉन के लक्षण
    (i) शरीर फूलदान के समान होता है । ये कालोनियल होते हैं पर प्रत्येक बेलन अलग-अलग ऑस्कुलम द्वारा खुलते हैं।
    (iii) ऑस्टिया पूरे शरीर पर पाये जाते हैं।
    (iv) प्रत्येक बेलन में स्पॉन्जोसील पायी जाती है।
    (v) कीप कोशाएँ सिर्फ अरीय नाल (Radial canal) में पायी जाती हैं।
    (vir पोषण, श्वसन, उत्सर्जन, नाल तन्त्र के द्वारा होता है।
    (vii) ये समुद्र के उथले पानी में चट्टानों से चिपके रहते हैं।
  2. यूस्पॉन्जिया (Euspongia)-
    संघ पोरीफेरा
    वर्ग -डेमोस्पॉन्जी
    उपवर्ग -सैरेक्टिनोमार्फा
    गण- डिक्टाओसैरेटिडा
    वंश- यूस्पॉन्जिया
    Euspongia characteristics यूस्पॉन्जिया के लक्षण
    (i) यह प्राय: उष्ण कटिबन्धीय या उपोष्ण कटिबन्धीय समुद्रों में पाया जाता है तथा भारत के पश्चिमी तटों
    पर भी पाया जाता है।
    (ii) ऑस्कुलम एक विशेष प्रकार के उभार में पाये जाते हैं जिन्हें कोनुलाई (Conuli) कहते हैं।
    (ii) इनमें कंटिकाएँ नहीं पायी जाती । कंकाल केवल स्पॉन्जिन तन्तुओं का बना होता है।
    (iv) कभी-कभी इनके अन्दर एनेलिडा तथा क्रस्टेसियन जीव सहजीवी के रूप में पाये जाते हैं। इनका कोई शत्रु नहीं होता।
    (v) इनका शुष्क कंकाल कार, फर्नीचर आदि साफ करने तथा नहाने के काम आता है।

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