National commission : भारत के प्रमुख राष्ट्रीय आयोग व समिति

National commission : Top 10 भारत के प्रमुख राष्ट्रीय आयोग व समिति

National commission : भारत के प्रमुख राष्ट्रीय आयोग व समिति |National  commission for planing

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for minorities| National  commission for scheduled caste and scheduled tribes In Hindi

भारत के प्रमुख राष्ट्रीय आयोग ( National commission of India )

what is top National commission of India

नीति आयोग ( national  policy commission )

इस आयोग का गठन जनवरी 2015 में किया गया

उद्देश्य -राज्य सरकार व केंद्र सरकार के बीच साझा

मौद्रिक नीतियां बनाना ,पोषण सामजस्य और सह

भागिता को बढ़ावा देना

आयोग -नीति आयोग भारत सरकार का विचार बिंदु

या थिंक टैंक है इसके स्थापना का उददेश्य ,सरकार

के विकास लक्ष्यों की प्राप्ति। मौद्रिक नीतियाँ बनाना

मुख्यालय -नई दिल्ली

प्रमुख -प्रधानमंत्री

योजना आयोग ( National commission for planing)

आयोग का गठन 1950 में किया गया. संविधान में योजना आयोग का प्रावधान नहीं है. यह एक संविधानेत्तर निकाय है.

योजना आयोग की स्थापना संघीय मंत्रिपरिषद् द्वारा एक विशेष प्रस्ताव पारित करके की गई थी.

आयोग एक परामर्शदायी संस्था या सलाहकार संस्था है.

प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं. सामान्य कामकाज उपाध्यक्ष की देखरेख में होता है.

योजना आयोग का उपाध्यक्ष कैबिनेट मंत्री के समकक्ष होता है.

इसका उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक विकास के लिये एक पंचवर्षीय योजना बनाना और इसके लिये संघ के सलाहकारी संस्था

के रूप में कार्य करना है.

योजना आयोग के प्रथम उपाध्यक्ष गुलजारी लाल नंदा.


राष्ट्रीय विकास परिषद् ( National commission for development)

इसकी स्थापना 1952 में की गई ।

इसके सदस्यों में प्रधानमन्त्री एवं राज्यों के मुख्यमंत्री होते हैं.

1967 से केन्द्रीय मन्त्रीमण्डल के सदस्य तथा संघ राज्य क्षेत्र के प्रशासक भी इसके सदस्य बनाये गये.

पंचवर्षीय योजनाओं को अंतिम स्वीकृति राष्ट्रीय विकास परिषद् ही देता है.

राष्ट्रीय एकता परिषद् ( National commission for Unity)

राष्ट्रीय एकता परिषद् के गठन के संबंध में न तो संविधान में प्रावधान किया

गया है न तो किसी अन्य अधिनियम में.

इसका गठन सितम्बर-अक्टूबर 1961 में आयोजित ‘राष्ट्रीय एकता सम्मलेन

1961’ द्वारा किया गया.

परिषद् के गठन का मुख्य उद्देश्य साम्प्रदायिकता, जातिवाद और क्षेत्रवाद की समस्या पर विचार विमर्श करना

तथा सरकार से समुचित कार्यवाही करने की सिफारिश करना है.

परिषद् का गठन प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है. इसका गठन सर्वप्रथम नेहरू की अध्यक्षता में 1961 में किया गया था.

वर्ष 1991 में भी प्रधानमंत्री ने इसकी बैठक आहूत की थी.

इसकी पिछली बैठक 2008 में हुई थी.

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ( National commission for Human Right )

राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के तहत 12 अक्टूबर 1993 में गठित

परामर्शदात्री संस्था (advisory body)

सदस्य – 1 अध्यक्ष + 7 अन्य सदस्य

नियुक्ति – राष्ट्रपति द्वारा

योग्यता – अध्यक्ष अनिवार्य रूप से भारत का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायमूर्ति होना चाहिए.

कार्यकाल – 5 वर्ष या 70 वर्ष आयु तक कार्य – मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की जांच करना एवं कार्यवाही की सिफारिश करना.

मानवाधिकार संरक्षण के उपाय सुझाना. मानवाधिकार पर अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदा को लागू कराना.

राष्ट्रीय महिला आयोग ( National commission for women)

राष्ट्रीय महिला आयोग अधि. 1990 के तहत 31 जनवरी 1992 में गठित परामर्शदात्री संस्था (advisory body)

सदस्य – 1 अध्यक्ष + 5 अन्य सदस्य

नियुक्ति – केन्द्र सरकार द्वारा मनोनीत

कार्यकाल – 3 वर्ष

कार्य – स्त्रियों के अधिकारों की रक्षा की उचित देखभाल, उनकी दशा सुधारने के लिए योजनाओं की सिफारिश करना, उन पर हो

रहे अत्याचार की जांच करना, स्त्रियों की शिक्षा, स्वास्थ्य आदि में आने वाली बाधाओं को दूर करने की सिफारिश करना,

प्रथम अध्यक्ष जयंती पटनायक थीं.

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (National commission for minorities )

1978 में अल्पसंख्यक आयोग का गठन

1992 से राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधि. 1992 से

सांविधिक दर्जा

17 मई 1993 को पहला राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग गठित

परामर्शदात्री संस्था (advisory body)

सदस्य – 1 अध्यक्ष, 1 उपाध्यक्ष एवं 5 अन्य सदस्य

नियुक्ति – केन्द्र सरकार द्वारा मनोनीत

योग्यता – अल्पसंख्यक वर्ग का होना आवश्यक है.

कार्यकाल – 3 वर्ष

कार्य – अल्पसंख्यकों संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों की रक्षा एवं उचित देखभाल, अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक एवं आर्थिक

दशा सुधारने के लिए योजनाओं की सिफारिश करना, उन पर हो रहे अत्याचार की जांच करना, उनके विकास में आने वाली

बाधाओं को दूर करने की सिफारिश करना,

भारत सरकार के कल्याण मंत्रालय ने 5 धार्मिक समुदायों यथा- मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध एवं पारसी को अल्पसंख्यकों के

रूप में अधिसूचित किया है.

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ( national commission for protection of child rights )

अधिनियम के अनुसार आयोग के निम्नलिखित दायित्व हैं :

(क) किसी विधि के अधीन बाल अधिकार के संरक्षण के लिए

सुझाये गये उपायों की निगरानी व जांच करना जो उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र सरकार को सुझाव देते हैं

(ख ) उन सभी कारकों की जांच करना जो आतंकवाद,

सांप्रदायिक हिंसा, दंगों, प्राकृतिक आपदा, घरेलू हिंसा, एचआईवी-एड्स, तस्करी, दुर्व्यवहार, यातना और शोषण,

वेश्यावृत्ति और अश्लील साहित्य से प्रभावित बच्चों के खुशी के अधिकार व अवसर को कम करती है और

उसके लिए उपचारात्मक उपायों का सुझाव देना

(ग) ऐसे संकटग्रस्त, वंचित और हाशिये पर खड़े बच्चे जो बिना परिवार के रहते हों और कैदियों के बच्चों से संबंधित मामलों

पर विचार करना और उसके लिए उपचारात्मक उपायों का सुझाव देना ।

(घ) समाज के विभिन्न वर्गों के बीच बाल अधिकार साक्षरता का प्रसार करना और बच्चों के लिए उपलब्ध सुरक्षोपाय

के बारे में जागरूकता फैलाना ।

(ङ) केन्द्र सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी अन्य

प्राधिकारी सहित किसी भी संस्थान द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक संस्थान जहां बच्चों को हिरासत में या उपचार के उद्देश्य से

या सुधार व संरक्षण के लिए रखा गया हो, वैसे बाल सुधार गृह या किसी अन्य स्थान पर जहाँ बच्चों का निवास हो या उससे जुड़ी

संस्था का निरीक्षण करना

(च) बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन की जाँच कर कुछ मामलों में कार्यवाही प्रारम्भ करना और स्वत: संज्ञान लेना

संरचना

1 अध्यक्ष, 6 अन्य सदस्य एवं 1 सदस्य सचिव

शक्तियां

आयोग को सिविल न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त होंगी.


प्रमुख आयोग/समितियां

संविधान की प्रारूप समिति -अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अम्बेडकर राज्य पुनर्गठन आयोग, 1953 अध्यक्ष, सैय्यद फजल अली

बलवंत राय मेहता समिति 1957 – त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का पक्ष

स्वर्ण सिंह समिति-मौलिक कर्तव्यों पर संस्तुति

मंडल आयोग, 1978-79 -अध्यक्ष, बिन्देश्वरी प्रसाद मंडल (आरक्षण पर संस्तुति)

प्रसाद समिति-अध्यक्ष, रामानंद प्रसाद (क्रीमी लेयर पर संस्तुति)

सरकारिया आयोग- 1983 अध्यक्ष, आर.एस. सरकारिया (केन्द्र राज्य संबंध पर)

तारकुण्डे समिति, 1988 अध्यक्ष, बी.एम. तारकुण्डे (केन्द्र राज्य संबंध पर)

जाम मलिमथ समिति -मलिमथ समिति, अपराधिक कानूनों में सुधार

एम.एम. पुंछी आयोग, 2008 अध्यक्ष, एम.एम. पुंछी (केन्द्र राज्य संबंध पर)

दिनेश गोस्वामी समिति, 1990चुनाव सुधार (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन, फोटोयुक्त पहचान पत्र की संस्तुति)

संविधान समीक्षा आयोग, 2001 अध्यक्ष, एम.एन. वेंकटचेलैया

शेनाय समिति, 2000 अध्यक्ष, पी.डी. शेनाय (ध्वज संहिता पर संस्तुति

पहला प्रशासनिक सुधार आयोग अध्यक्ष, मोरारजी (मृत्यु पर हनुमथैया )

दूसरा प्रशासनिक सुधार आयोग- अध्यक्ष वीरप्पा मोइली

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग (national commission for scheduled caste and scheduled tribes)

1978 में भोला पासवान शास्त्री की अध्यक्षता में प्रथम

बहुसदस्यीय आयोग का गठन.

65वां संविधान संशोधन अधि. 1990 के तहत 12 मार्च 1992 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग गठित.

89वां संविधान संशोधन अधिनियम 2003 के द्वारा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनु.जनजाति आयोग को

  1. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग एवं
  2. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग

से प्रतिस्थापित किया गया एवं संविधान में अनु. 338(ए) जोड़कर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के

गठन का प्रावधान किया गया.

प्रथम अध्यक्ष रामधन थे.

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग

( National commission for scheduled tribes )

89वां संविधान संशोधन अधि. 2003 के द्वारा संविधान में अनु. 338(ए) जोड़कर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के गठन का

प्रावधान किया गया तथा 2004 में पहले राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन.

परामर्शदात्री संस्था

सदस्य – 1 अध्यक्ष, 1 उपाध्यक्ष एवं एक महिला सहित अन्य सदस्य

नियुक्ति – राष्ट्रपति द्वारा

कार्यकाल – 3 वर्ष

कार्य – अनु. जनजातियों के अधिकारों की रक्षा की उचित देखभाल, उनकी दशा सुधारने के लिए योजनाओं की सिफारिश करना,

उन पर हो रहे अत्याचार की जांच करना, उनके विकास में आने वाली बाधाओं को दूर करने की सिफारिश करना,

संघ तथा राज्य सरकारों को अनुसूचित जनजातियों को प्रभावित करने वाली सही नीतिगत मामलों पर परामर्श देना.

प्रथम अध्यक्ष कुंवर सिंह थे,

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग

( National commission for scheduled caste )

65वां संविधान संशोधन अधि, 1990 के तहत 12 मार्च 1992 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग गठित,

प्रथम अध्यक्ष रामधन थे,

89वां संविधान संशोधन अधिनियम 2003 के द्वारा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनु.जनजाति आयोग को

  1. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग एवं
  2. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग

से प्रतिस्थापित किया गया एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जाति

एवं अनु.जनजाति आयोग का स्थान राष्ट्रीय अनुसूचित

जाति आयोग ने ले लिया.

परामर्शदात्री संस्था

सदस्य– 1 अध्यक्ष + 1 उपाध्यक्ष + अन्य सदस्य

नियुक्ति – राष्ट्रपति द्वारा

कार्यकाल – 3 वर्ष

कार्य – अनु. जातियों के अधिकारों की रक्षा की उचित देखभाल, उनकी दशा सुधारने के लिए योजनाओं की सिफारिश करना,

उन पर हो रहे अत्याचार की जांच करना, उनके विकास में आने वाली बाधाओं को दूर करने की सिफारिश करना.

संघ तथा राज्य सरकारों को अनुसूचित जातियों को प्रभावित करने वाली सभी नीतिगत मामलों पर परामर्श देना.


केन्द्रीय सतर्कता आयोग (CENTRAL VIGILANCE COMMISSION )

संथानम समिति के सुझाव पर 1964 में गठित.

2003 से सांविधिक दर्जा

परामर्शदात्री संस्था

सदस्य – 1 केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त एवं 2 सतर्कता आयुक्त

कार्यकाल – 4 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक

नियुक्ति – राष्ट्रपति द्वारा

कार्य – लोक सेवकों के विरूद्ध लगाए आरोपों की जांच तथा दोषी अधिकारियों के विरूद्ध मुक़दमा चलाने के लिए सरकार

को परामर्श देने हेतु. यह राजपत्रित अधिकारियों तथा उनके समान स्तर वाले कर्मचारियों के भ्रष्टाचार के मामलों की जांच

करता है. भ्रष्टाचार रोकने के उपाय सुझाना.

क्षेत्राधिकार – केन्द्रीय शासन, सार्वजनिक उद्यम, सामूहिक निकायों के समस्त कर्मचारियों, केन्द्रीय शासन के संगठनों तक विस्तृत.

केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंपे गये मामलों को अपने नियन्त्रण में ले सकता है.

प्रथम केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त एन. विट्ठल थे.

लोकपाल व लोकायुक्त

लोकपाल सरकार एवं प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच एवं कार्यवाही करने के लिये नियुक्त पदाधिकारी होता है.

ओम्बुड्समैन नामक पदाधिकारी एक ऐसा ही स्वतंत्र और सर्वोच्च अधिकारी है जो स्वीडन में सर्वप्रथम नियुक्त किया गया था.

लोकपाल पद की संकल्पना इसी से ली गई है.

प्रशासकीय सुधार आयोग (1967) ने भारत में ओम्बुड्समैन के समान केन्द्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त पदाधिकारी

की नियुक्ति की सिफारिश की थी.

भारत में संघ में लोकपाल पद के लिए कानून अभी पारित नहीं हो सका है.

लोकपाल की तरह राज्यों में लोकायुक्त का पद है. कुछ राज्यों में लोकायुक्त के पद पर नियुक्ति की गई है. लोकायुक्त राज्यपाल

द्वारा नियुक्त किये जाते हैं.

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