Good Friday 2021- गुड फ्राइडे क्यों मनाते हैं

गुड फ्राइडे पर्व Good Friday गुड फ्राइडे क्यों मनाते हैं Easter Day Meaning in Hindi ईस्टर डे का मतलब इन्ही की जानकारी हम इस लेख में जानने का प्रयास करेंगे

यूँ तो पुरे संसार में अनेक धर्म को मानने वाले लोग है जिसमे से एक प्रमुख धर्म प्रभु यीशु को मानने वाले हैं इस धर्म के लोग पूरी दुनिया में मौजूद है  हम  सभी यीशु के जन्म उत्सव यानि क्रिसमस के त्यौहार जो 25 दिसम्बर को मनाया जाता है 

This Year Good Friday-2 April 2021 and Easter Day-4 April 2021


ईस्टर के रविवार के पहले शुक्रवार आता है, उस दिन को गुड फ्राइडे कहते हैं। जीसस ने सूली पर लटकते वक्त अन्तिम समय में यही कहा-“हे प्रभु! इन्हें माफ करना, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं ?”

Easter Day Meaning in Hindi ईस्टर डे का मतलब

ईस्टर डे का मतलब होता है जिस दिन यीशु मरने के पश्चात पुनर्जीवित ( Resurrection )हो गए थे यानि पुनर्जीवित होने वाले दिन को ईस्टर डे कहा जाता है यह दिन रविवार का दिन था इससे पहले शुक्रवार को  जीसस को सूली में चढ़ाया गया दिन गुड फ्राइडे कहलाता है 

गुड फ्राइडे क्यों मनाते हैं


इस दिन को ईसाई धर्म में सबसे अधिक गंभीर माना जाता है। इसी दिन प्रभु ईसा को फाँसी पर चढ़ाया गया था। इस दिन रोम के सेंट पीटर्स नामक ईसाइयों के सबसे बड़े गिरिजाघर में शोक छाया रहता है। इस दिन पादरी और उनके कर्मचारी शोक के रंगवाली पोशाक पहनते हैं और अपने अस्त्रों को उल्टा लेकर चलते हैं।
असल में इसे हमारे देश में शहीद दिवस कहा जाता है, परन्तु ईसाई धर्म के लोग इसे अच्छा शुक्रवार( Good Friday) कहते हैं। सब गिरिजाघरों में प्रार्थना सभाएँ होती हैं।
मानवता के इस पुजारी ने अपने विरोधियों को क्षमादान दिया। अपने उत्सर्ग से उन्होंने दुष्टता की सत्ता को खत्म किया। यीशु को इस बात का पूर्वाभास था कि ईश्वर की इच्छा क्या है ? इसके बावजूद वे अपने दुश्मनों से मिलने चले गये और उन्होंने शत्रुओं के हाथों मृत्यु स्वीकार करके मानवता की रक्षा की।
गुड फ्राइडे का संदेश है कि पाप को कभी पाप से नहीं जीत सकते। केवल अच्छाई से हीजीत सकते हैं। हिंसा को अहिंसा से तथा घृणा को प्रेम से जीता जा सकता है।
इस दिन को प्रार्थना एवं प्रायश्चित् का दिन माना जाता है। मसीही समाज के लोग जीसस के बलिदान को याद करके इस दिन घरों और चर्च में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। यह दोपहर दो से तीन बजे के बीच आयोजित की जाती हैं।
यह माना जाता है कि इसी समय प्रभु यीशु को सलीब पर लटकाया गया था। मसीही समाज द्वारा पिछले चालीस दिन से किये जा रहे उपवास का यह अंतिम दिन होता है।
इस दिन उन सात वचनों को विशेष रूप से याद किया जाता है। जो जीसस ने क्रॉस पर लटकते वक्त कहे थे। इनमें प्रमुख है

“हे प्रभु, इन्हें माफ करना क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं ?”

जिस सलीब पर ईसा मसीह को लटकाया गया था, उसके प्रतीक के रूप में श्रद्धालुओं की श्रद्धा स्वरूप लकड़ी का तख्ता गिरिजाघरों में रखा जाता है।
दोपहर बाद दो बजे से तीन बजे तक ईसाई सिद्धांतों में से किसी एक का पठन किया जाता है। इसके बाद प्रवचन, ध्यान और प्रार्थनाएं की जाती हैं।
शैलोपदेश विख्यात उपदेशों का सार इस प्रकार है-

अन्दर दीनभाव, आर्तभाव, विनयशीलता, दयालुता, अन्तःकरण शुद्धि, शान्ति प्रचार, कष्ट सहना, व्यभिचार न करना, बुरे मन से किसी स्त्री को न देखना, दायें गाल पर थप्पड़ मारे तो उसकी ओर बाँया गाल भी कर दो, पड़ौसी ही नहीं वैरी से भी प्रेम रखना, दान छिपाकर देना, कोठरी का द्वार बंद कर गुप्त रूप से प्रार्थना करना, माँगना नहीं, उपवास भी गुप्त रखना, कोई एक साथ दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता, कल की चिन्ता मत करो, उपयुक्त व्यक्ति को दान, आदि।

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