Biography of Dr.Br Ambedkar-अंबेडकर जीवन परिचय

आपके समक्ष अंबेडकर जी का  जीवन परिचय Biography of Dr.Br Ambedkar (जीवनी )लेकर आये है उम्मीद है आपको जरूर पसंद आएगी 

अंबेडकर जीवन परिचय- Biography of Dr.Br Ambedkar

जन्म एवं बचपनBiography of Dr.Br Ambedkar in Hindi
विदेशी दासता की बेड़ियाँ हमारे देश को जकड़े थी। कुरीतियाँ समाज को प्रभा मण्डल को क्षीण कर रही थी। जाति-पाँति और छुआछूत का मोहरा चहुंओर आच्छादित था। घने काले मेघों के बीच से प्रकट होने वाले रवि के समान विकट परिस्थितियों के बीच इस धरा पर एक दिव्य प्रतिभा ने जन्म लिया।
उस मेघावी बालक का नाम था भीमराव आज से 129 वर्ष पूर्व 14 अप्रैल 1891को महू कैट इन्दौर में जन्मे भीमराव का परिवार महार नामक जाति से था। वह अपने माता- पिता की चौदहवी सन्तान थे। वह अपने आपको चौदहवां रत्न कहकर बहुत खुश होते थे। माँ भीमाबाई आँखों का तारा मानती थी उन्हें गोद में खिलाती और दूलार से कहा करती, “मेरा भीम बड़ा आदमी बनेगा” माँ भीमाबाई का वह सपना साकार हुआ। आगे चलकर वही बालक डॉ. भीमराव अम्बेडकर के रूप में आमजन के मसीहा बने और विश्वविख्यात हुए।

भीमराव के दादाजी का नाम मालोजी राव था। वे अंग्रेजों के सेना में हवलदार के पद पर थे। वीरता के लिए उनको 16 तमगे प्राप्त हुए।

उनके पुत्र और भीम के पिता रामजी समपाल भी अंग्रेजी सेना में सूबेदार के बाद पर कार्यरत थे। श्री समपाल वर्ष 1894 में सेना से सेवानिवृत्त हुए। वे सपरिवार दापोक्ती आ बसे थे। सन् 1896 में उनको सतारा में P.W.D. के कार्यालय में स्टोर कीपर की नौकरी मिल गई। वे अपने परिवार को भी दापोली से सतारा ले गये।

भीम का शरीर हृष्ट-पुष्ट था। वे स्वभाव से स्वाभिमानी थे।
अपनी आन पर जिद पकड़ लेते और आने लक्ष्य को प्राप्त करके ही दम लेते थे।
आगे चलकर यही स्वाभिमान शौर्य साहस और आन पर मर मिटने का दृढ़ कदम पर कदम उनका मार्ग प्रशस्त करते रहे।


शिक्षा-Dr.Br Ambedkar Education


भीम को बचपन से ही किताबों के प्रति लगन थी। अबोध और निरक्षर बालक को जब भी कोई लिखा पन्ना हाथ लगता वह उस पर लिखे एक एक शब्द को इतने मनोयोग से देखता मानो ये शब्द ही उसके जीवन की लौ हो। वह स्कूल जाते बच्चो को बड़े गौर से देखा करता और अनेकों बार तो उनके साथ-साथ ही चलने लगता। माता भीमा बाई बालक को अपने गोदी में उठाये घर लाती।
भीमराव जब छह वर्ष के हुए तो उनहे सतारा के कैण्ट स्कूल में भर्ती कराया गया।

अम्बेडकर

उनका उपनाम अम्बावडेकर था। अम्बेडकर से अम्बेडकर कैसे पड़ा—इसके बारे में आगे चल कर उन्होंने अपने विचार इस प्रकार व्यक्त किये थे—“अम्बेडकर नाम के एक ब्राह्मण मास्टर हमें पढ़ाते थे। वे हमें कुछ ज्यादा पढ़ाते नहीं थे। लेकिन उनका मुझसे बहुत प्रेम व वात्सल्य था। बीच की खाने की छुट्टी में खाने के लिए मुझे स्कूल से दूर अपने स्वयं के घर जाना पड़ता था। छुआछूत की वजह से वह अपनी साग रोटी दूर से मेरे हाथों में डालते थे। मुझे यह कहने में अभिमान मालूम होता है कि उस प्रेम के साग रोटी का मिठास कुछ और ही था। एक दिन उन्होंने मुझसे कि यह तेरा अम्बावडेकर नाम बोलने में अटपटा है। उससे मेरा उपनाम अम्बेडकर बोलने में साफ स्पष्ट है। अब आगे तू भी अम्बेडकर उपनाम लगाया कर और उन्होंने रजिस्टर में वैसा ही दर्ज कर दिया।

विद्यालयी परिवेश भी छुआदूत से अछूता नहीं था। दूसरे छात्र कमरों में डेस्कों पर बैठकर पढ़ते थे। भीम और उसके आनन्दराव को बाहर बरामदे में बैठकर पढ़ना पड़ता था। यह वह जगह थी जहाँ पर दूसरे छात्र अपने जूते निकालते थे। उन्होंने इस स्कूल में अनेक कठिनायों का सामना किया पर इन्हीं विपरीत परिस्थितियों में बालक अम्बेडकर 1902 में प्राइमरी शिक्षा प्राप्त की। तथा शल्फिटन स्कूल से उन्होंने सन् 1907 में मैट्रिक की
परीक्षा उत्तीर्ण  की। तथा उनका विवाह मातृ-पितृ विहीन कन्या रमाबाई के साथ हुआ। उस समय रमाबाई की उम्र 9 वर्ष थी वह सुन्दर तथा सरल स्वभाव की अबोध बालिका थी।

Ambedkar विदेश में शिक्षा 

इसके बाद 1912 में भीमराव ने तृतीय श्रेणी में ही बी.ए. पास किया। तथा इसके बाद 2 फरवरी, 1913 का मनहूस दिन था। भीमाबाई तो उनको छह वर्ष का छोड़कर ही चल बसी थी। इसके बाद में उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गये।

वहाँ जाकर कोलम्बिया विश्वविद्यालय में प्रवेश किया। अर्थशास्त्र प्रमुख विषय तथा समाजशासन राज्यशास्त्र मानवदंश शास्त्र तत्वज्ञान सहायक विषय लेकर एम.ए. करने में जूट गये। 1915 में उन्होंने एम.ए. की उपाधि प्राप्त की। 1916 में पी.-एच.डी. की उपाधि प्रदान की गई।
समाज सुधारक-
छुआछूत के जिन शोलों ने डॉ. अम्बेडकर को झुलझाया था वे घाव आज तक भी थे। होते भी कैसे भला बिना मवाद निकले फोड़ा ठीक हुआ। वे कोलम्बिया विश्वविद्यालय से एम.ए. पी.-एच.डी. तथा लन्दन विश्वविद्यालय से एम.एस.सी.डी.एस.सी.. तथा बार एट लॉ जैसी डिग्रियाँ प्राप्त थे। उस समय भारत के वे अकेले ऐसे उभरे विद्वान थे।
जिनके पास इतनी डिग्रियाँ थी। कुछ समय पश्चात वे गाँधी के पास गये तथा गाँधीजी से छुआछूत के बारे में चर्चा की तथा गाँधीजी भी इस वर्ण को जड़ मूल से मिटाना चाहते थे। ताकि जाति-पाँति व छुआछूत स्वत: ही समाप्त हो जाये।

अपने आन्दोलन को जन जन तक पहुँचाने के लिये उन्होंने प्रिंट मीडिया को उचित माध्यम माना डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने 29 जुलाई, 1927 को अपने पत्रिका “बहिष्कृत भारत’ नामक पाक्षिक में लिखा था, यदि लोकमान्य तिलक अछूती में पैदा हुए होते तो वह” स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” यह आवाज़ बुलन्द न करते बल्कि उनका सर्वप्रथम नारा होता “अछूतपन का नाश करना मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है।

अछूत समाज के प्रति यह उनकी सच्ची सच्ची हमदर्दी थी।

बहिष्कृत हितकारिणी सभा

अछूती द्वार आन्दोलन को नई दिशा देने के लिए उन्होंने 20 जुलाई, 1924 को बम्बई में “बहिष्कृत हितकारिणी सभा” की स्थापना की इसके बाद 19 मार्च, 1927 को डॉ. अम्बेडकर की अध्यक्षता में ही दलित जाति परिषद का अधिवेशन हुआ ।

12 नवम्बर, 1930 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री रेम्जे मैक्डोनाल्ड की अध्यक्षता में प्रथम गोलमेज कॉन्फ्रेंस प्रारम्भ हुई। इसमें भारत की तरफ से दलितों के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. अम्बेडकर और राव बहादुर श्री निवास को आमंत्रित किया गया था। तथा 7 सितम्बर, 1931 को दूसरी गोलमेज कॉन्फ्रेंस की बैठक हुई।

‘संघ शासन का ढाँचा कमेटी’ में संघ शासन का ढाँचा तैयार करने का काम डॉ. अम्बेडकर को सुपुर्द कर दिया।
दूसरी गोलमेज कॉन्फ्रेंस की बैठक 7 सितम्बर को फिर शुरु होकर 1 दिसम्बर, 1931 को समाप्त को गई परन्तु आपस में कोई समझौता न हो सका। तथा इसके बाद 15 अगस्त 1947 को भारत संघ अंग्रेज शासन से मुक्त हुआ स्वतन्त्र देश की शासन प्रणाली को चलाने स्वतन्त्र देश की शासन प्रणाली को चलाने हेतु उसका लिखित या मौखिक संविधान होना अपरिहार्य है। 11 दिसम्बर, 1946 के दिन डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थाई अध्यक्ष चुना गया।

संविधान सभा में डॉ. अम्बेडकर

24 अगस्त, 1947 को एक सात सदस्यीय संविधान प्रारूप समिति बनाई गई। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर को उसका अध्यक्ष बनाया गया। तथा इसके बाद संविधान निर्माण का पूरा काम डॉ. अम्बेडकर के कर कमलो द्वारा ही सम्पन्न प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने संविधान का यह प्रारूप संविधानसभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद व प्रधानमंत्री पंडित नेहरु को सौप दिया।

26 नवम्बर, 1949 को संविधान सभा ने नवनिर्मित संविधान को स्वीकृत एवं अंगीकार किया। इस बीच इसमें 7638 संशोधन हुए और 26 जनवरी, 1950 को इसे लागु किया गया। संविधान बनाने में कुल 2 वर्ष 11 माह 18 दिन लगे। बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, राजशास्त्र, धर्मशास्त्र ,मानवशास्त्र, भाषाशास्त्र,नीतिशास्त्र, विधानशास्त्र, तत्तवज्ञान धर्म, कानून व इतिहास के प्रकाण्ड विद्वान थे। तथा वस्तुत: वे विश्व की महान विभूति थे।

उन्होंने अनेक पुस्तकें लिखी जिसमें सबसे महत्त्वपूर्ण पुस्तक शुद्र कौन थे शूद्र कौन और कैसे हैं तथा भारत में जातिवाद आदि पुस्तकें लिखी थी।

अन्तिम यात्रा-
5 दिसम्बर, 1956 की रात 1956 की रात को उन्होंने इस ग्रन्थ की भूमिका लिखकर उसे पूर्ण किया और भोजन करके प्रसन्नचित सो गये।

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